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सेविंग और करेंट अकाउंट क्या होते है

What is Current and Saving Account  –  बैंक अकाउंट होना आज हर व्यक्ति की अहम जरूरत है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के बाद तो गरीब से गरीब व्यक्ति के पास उसका अपना बैंक खाता है। एटीएम का इस्तेमाल करते समय आपने देखा होगा कि आपसे आपके बैंक खाते का नेचर यानी उसके चालू अथवा बचत खाता होने के बारे में पूछा जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चालू खाता(करेंट अकाउंट) और बचत खाता (सेविंग अकाउंट) में क्या अंतर होता है और इनकी क्या खूबियां और सीमाएं होती हैं।

आज हम बैंक में खातों के कितने प्रकार (Types of Accounts in Bank) होते हैं, उसके विषय में चर्चा करेंगे.

  • बैंक के खाते चार प्रकार (Four Types) के होते हैं:-
    • 1-चालू खाता – Current Account
    • 2-बचत खाता- Savings Account
    • 3-आवर्ती जमा खाता- Recurring Deposit Account
    • 4-सावधि जमा खाता- Fixed Deposit Account

#1. Saving Account – बचत खाता (सेविंग अकाउंट)

बचत खाता (सेविंग अकाउंट): यह खाता आम लोगों के लिए होता है और निजी लेन-देन निबटाने के काम आता है। लेकिन इस अकाउंट पर लेनदेन की सीमाएं होती हैं। अमूमन एक दिन में एक बचत खाते से अधिकतम पांच ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं। बचत खातों में जमा राशि पर बैंक ब्याज भी देता है, ज्यादातर बैंकों में यह ब्याज की दर चार से छह फीसदी होती है। इसलिए बचत खाता खुलवाने से पहले बैंक कितना ब्याज दे रहा है ये जरूर जान लें। यहां ये जानना भी जरूरी है कि सेविंग अकाउंट के ब्याज पर टैक्स लगता है, हालांकि 10 हजार रुपये सालाना ब्याज पर टैक्स में राहत का प्रावधान है। बचत खाता रखने वालों को बैंक की ओर से चेक बुक, डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें ज्यादातर सुविधाएं फ्री हैं लेकिन कुछ सेवाओं पर बैंक फीस ले सकते हैं।

नाम से ही स्पस्ट है कि सेविंग अकाउंट सेविंग करने के लिए बनी है. हम-आप जैसे लोग चाहते हैं कि हमें हमारे जमे पैसे पर सूद (interest) मिले और कम-से-कम अपने अकाउंट से पैसे निकाले. जितना जमा उतना अच्छा. कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी कंपनी में काम करता हो, सरकारी नौकर हो, पेन्शनर हो, छात्र हो….वह सेविंग अकाउंट में अपना अकाउंट खोल सकता है. जैसा मैंने बताया कि सेविंग अकाउंट में धारक को जमे पैसे पर इंटरेस्ट  भी मिलता है. बचत खाता के धारक कभी भी अपने जमा धन को बैंक से निकाल सकते हैं और डाल सकते हैं. पैसे जमा करने की संख्या में restriction तो नहीं पर पैसे बाहर निकालने की संख्या में कुछ restrictions जरुर हैं. जैसे आप Rs. 50 से कम पैसे नहीं निकाल सकते या ATM से ६ महीने के अन्दर 30 से ज्यादा बार पैसे नहीं निकाल सकते (this policy changes time to time by banks). चालू खाते की तरह आप कभी भी, कहीं भी, जितना भी….पैसे नहीं निकाल सकते. अधिकांश बैंक अपने ग्राहक को अपने अकाउंट में न्यूनतम राशि बनाए रखने के लिए बाध्य करती है.

इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए आप जरूरी बिलों का भुगतान कर सकते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं, फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। डेबिट कार्ड के जरिए भी पैसा निकासी, शॉपिंग आदि की जा सकती हैं। आमतौर पर बचत खाते में न्यूनतम राशि रखने की शर्त होती है। सरकारी बैंकों में ये राशि 500-1000 रुपये तक हो सकती है लेकिन निजी बैंक इस मामले में अलग हैं, वहां पांच हजार, 10 हजार से 25 हजार रुपये न्यूनतम राशि रखना होता है। हालांकि कुछ खातों (छात्रों द्वारा वजीफे के लिए खोले खाते, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खाते आदि) में जीरो बैलेंस भी रखा जा सकता है।

#2. Current Account – चालू खाता (करेंट अकाउंट)

 

चालू खाता (करेंट अकाउंट): चालू खाता मुख्य रूप से उद्द्यमी, फर्म, कम्पनी आदि के लिए होता है. जिनके अकाउंट में पैसा का फ्लो बहुत होता है…बहुत से मतलब…कि लाखों रुपये उनके अकाउंट में आते हैं और निकाल भी लिए जाते हैं….तो ऐसे लोग चालू खाता में अपने पैसे रखते हैं. ऐसे अमीर लोगों या फर्म को इन्वेस्टमेंट या अपने पैसे में इंटरेस्ट (interest) मिलने में कोई इंटरेस्ट नहीं रहता. चालू खाता की खूबी यह है कि इसमें deposit (जमा करने) या withdrawal (पैसे निकालने) की कोई सीमा नहीं है. चालू खाते में धारक को इंटरेस्ट नहीं मिलता. हाँ, बैंक उनसे सर्विस चार्ज जरुर लेती है.

चालू खाता बचत खाते से बिल्कुल अलग होता है। यह खाता विशेषकर कारोबारियों के लिए होता है। इस खाते में बचत खाते की तरह लेन-देन की कोई सीमा नहीं होती है यानि एक दिन में आप कितने भी ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। चालू खाते में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता है लेकिन इस खाते का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि बैंक कारोबारियों को इसके जरिए पैसा देती है ताकि उनके बिजनेस में रुकावट ना आए। साथ ही बैंक चालू खाते में ओवर ड्राफ्ट की सुविधा भी देती है। यानी चालू खाते से कारोबारी उसमें मौजूद रकम से ज्यादा पैसा भी निकाल सकते हैं। किसी चालू खाते से कितनी राशि ओवरड्राफ्ट की जा सकती है इसका निर्धारण बैंक खाताधारक के टर्नओवर, मुनाफे आदि को ध्यान में रखकर तय करते हैं।

चालू खाता कोई व्यक्ति निजी रूप से या संयुक्त खाते के तौर पर खोल सकता है। इसके अलावा कंपनियों, प्राधिकरणों, ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सोसायटियों द्वारा ये खाते खोले जा सकते हैं। चालू खाते पर बैंक ऐसी कई सुविधाएं देते हैं जिनसे खाताधारक कंपनियों-संस्थाओं को अपने कामकाज में आसानी हो। इनमें डिमांड ड्राफ्ट या पे ऑर्डर जारी करने, एनईएफटी से फंड ट्रांसफर, डोर स्टेप बैंकिंग, चेक कलेक्शन और भुगतान, मुफ्त कैश डिपॉजिट आदि शामिल हैं।

#3. Recurring Deposit Account – आवर्ती जमा खाता

आवर्ती जमा खाता या Recurring Deposit Account या RD account में वे लोग खाता खोलते हैं जो एक निश्चित राशि नियमित रूप से जमा करना चाहते हैं जिससे कि उन्हें अधिक ऊँची दर पर सूद/ब्याज/इंटरेस्ट मिले. RD अकाउंट में एक ख़ास राशि एक तय अवधि के लिए हर महीने जमा की जाती है और तय की गयी अवधि के समाप्त हो जाने पर सूद के साथ कुल राशि का भुगतान कर दिया जाता है. जमा करने की न्यूनतम अवधि 1 साल और अधिकतम 10 साल की होती है.

सूद की दर जमा पैसे और जमा की अवधि के हिसाब से अलग-अलग प्लान में अलग-अलग होती है. जैसे आप 10 हज़ार हर महीने जमा कर रहे हैं, तो आपको ज्यादा इंटरेस्ट मिलेगा….किसकी तुलना में? जो केवल 4 हज़ार हर महीने जमा कर रहा है उसे कम इंटरेस्ट मिलेगा. वहीं आप अधिक अवधि के लिए पैसे जमा करने वाले हैं तो आपको अधिक इंटरेस्ट मिलेगा और कम अवधि के लिए कम इंटरेस्ट. RD अकाउंट में समय से पहले निकासी (पैसा निकालने) की सुविधा नहीं है. वैसे, बैंक चाहे तो maturity (खाता की अवधि पूरा होने) के पहले उसे बंद करने की अनुमति दे सकता है. आवर्ती जमा खाता में single या joint account खोला जा सकता है.

#4. Fixed Deposit Account – सावधि जमा खाता 

सावधि जमा खाता या FD account में एक ख़ास अवधि के लिए एक विशेष राशि रखी जाती है. यहाँ एक बार ही पैसा जमा कर सकते हैं और एक बार ही निकाल सकते हैं. RD अकाउंट की ही तरह इस खाते से भी आप समय से पहले पैसे नहीं निकाल सकते. तय की गई अवधि के पहले पैसे निकालने से आपको बैंक को penalty देनी पड़ती है (हर बैंक द्वारा तय की गयी  penalty amount अलग-अलग होती है) और अकाउंट को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाता है. फिक्स्ड डिपाजिट में उपभोक्ता को हाई इंटरेस्ट रेट दिया जाता है. इंटरेस्ट रेट जमा पैसे (deposited money) और जमा की अवधि (deposit period) के आधार पर तय की जाती है जो अधिकतम 10 साल तक लिए होती है.

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